राशि स्वरूप

ramaGermany

राशि – बारह राशि चक्र

(साइडेरियल) राशिचक्र एक कल्पित ३६० अंशों का वृत्ताकार पट्टा है (उष्णकटिबन्धीय राशिचक्र के समान), जिसे १२ समान भागों में विभक्त किया गया है। प्रत्येक द्वादशांश (३० अंश) को एक राशि कहा जाता है (संस्कृत: राशि अर्थात् ‘भाग’)।

ज्योतिष एवं पाश्चात्य राशिचक्र मापन-पद्धति में भिन्न हैं। यद्यपि समकालिक दृष्ट्या दोनों पद्धतियाँ समान प्रतीत होती हैं, तथापि ज्योतिष में प्रायः नक्षत्र राशिचक्र का उपयोग किया जाता है—जिसमें नक्षत्रों को स्थिर पृष्ठभूमि मानकर ग्रहगति का मापन होता है। इसके विपरीत पाश्चात्य ज्योतिष प्रायः उष्णकटिबन्धीय राशिचक्र ग्रहण करता है—जहाँ ग्रहगति का मापन वसन्त विषुव पर सूर्य की स्थिति के आधार पर किया जाता है।

कालक्रमेण यह भेद स्पष्ट हो जाता है। विषुवों की पूर्वगमन (precession) के कारण दो सहस्राब्दियों में प्रायः २२ अंशों का अन्तर उत्पन्न हो गया है। फलतः ग्रहों की स्थिति ज्योतिषीय (नक्षत्र) पद्धति में वास्तविक आकाशीय राशियों के अनुरूप रहती है, किन्तु पाश्चात्य ज्योतिष में प्रायः दो-तिहाई अवसरों पर ग्रह अगली राशि में गण्य हो जाते हैं।

Rāśi Svarupa

Rāśi Svarupa Slides

संख्या पाश्चात्य/संस्कृत नाम ( ) पाश्चात्य/यूनानी नाम तत्त्व गुण अधिपति ग्रह
1 Meṣa (मेष) Aries (राम) ram तेजस् (अग्नि) चर मङ्गल
2 Vṛṣabha (वृषभ) Taurus (बैल) bull पृथ्वी स्थिर शुक्र
3 Mithuna (मिथुन) Gemini (जुड़वाँ) twins वायु द्विस्वभाव बुध
4 Karkaṭa (कर्कट) Cancer (केकड़ा) crab जल चर चन्द्र
5 Siṃha (सिंह) Leo (सिंह) lion तेजस् स्थिर सूर्य
6 Kanyā (कन्या) Virgo (कुमारी) girl पृथ्वी द्विस्वभाव बुध
7 Tulā (तुला) Libra (तराजू) balance वायु चर शुक्र
8 Vṛścika (वृश्चिक) Scorpio (बिच्छू) scorpion जल स्थिर मङ्गल
9 Dhanus (धनुष) Sagittarius (धनुर्धर) bow तेजस् द्विस्वभाव गुरु
10 Makara (मकर) Capricorn (मकर/समुद्री प्राणी) sea-monster पृथ्वी चर शनि
11 Kumbha (कुम्भ) Aquarius (घटवाहक) pitcher वायु स्थिर शनि
12 Mīna (मीन) Pisces (मछली) fish जल द्विस्वभाव गुरु

हिंदू ज्योतिष में राशियाँ शरीर के अंगों से मेल खाती हैं:

राशि शरीर का विभाग
मेष शिरः (सिर)
वृषभ मुखम् (मुख)
मिथुन भुजौ (भुजाएँ)
कर्कट उरः (वक्षःस्थल)
सिंह उदरम् (जठर)
कन्या पृष्ठम्, आन्त्राणि (पीठ, आँतें)
तुला शिश्न, कटि (जननाङ्ग, कटि)
वृश्चिक गुप्ताङ्ग, गुदा
धनु ऊरू (जंघाएँ)
मकर घुटना
कुंभ निचले पैर
मीन पाद
संजय रथ (उड़िया: ସଞୟ ରଥ) पुरी के ज्योतिषियों के एक पारंपरिक परिवार से आते हैं, जिसका वंश श्री अच्युत दास (अच्युतानंद) से जुड़ा है। संजय रथ ज्योतिष की नींव के रूप में बृहत पाराशर होराशास्त्र, जैमिनी उपदेश सूत्र, बृहत जातक और कल्याणवर्मा की सारावली का उपयोग करते हैं और विभिन्न अन्य ज्योतिष शास्त्रों से शिक्षा देते हैं। उनकी समग्र शिक्षा और लेखन विभिन्न विचारधाराओं में फैले हुए हैं, हालांकि उन्होंने ज्योतिष का अपना ब्रांड नहीं बनाया है।