
अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च॥ १०-२०॥
ahamātmā guḍākeśa sarvabhūtāśayasthitaḥ |
ahamādiśca madhyaṁ ca bhūtānāmanta eva ca || 10-20||
सरल अनुवाद: हे घने बालों वाले (अर्जुन), मैं सभी प्राणियों के हृदय में रहने वाला आत्मा हूं। समस्त प्राणियों का आदि, मध्य और अंत भी मैं ही हूँ।
ज्योतिष नोट्स: सूर्य सभी जीवों में आत्मा और जीवन शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। यह सभी प्राणियों की आंतरिक प्रकृति को परिभाषित करने के साथ-साथ उनके स्वरूप को भी प्रकट करता है। यह सभी प्रकट प्राणियों की रचना का स्रोत है, साथ ही उनके निरंतर अस्तित्व (पोषण) और अंततः पोषण समाप्त होने पर उनके विलय का भी स्रोत है। इन क्रियाओं को क्रमशः तीन गुणों रजस-सत्व-तमस और गुण अवतार ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र द्वारा परिभाषित किया जाता है। तीन ध्वनियाँ अ-उ-म प्रत्येक प्राणी की इन अवस्थाओं के स्रोत के साथ-साथ उनकी रचना, पालन और विलय के स्रोत को भी परिभाषित करती हैं।





