प्रकीर्ण

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कृष्णाष्टकम

 संजय रथ  25 सितम्बर 2013

प्रतिदिन सुबह इसका पाठ करें

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ १॥
vasu-deva-sutaṁ devaṁ kaṅsa-cāṇūra-mardanam
devakī-paramānandaṁ kṛṣṇaṁ vaṅde jagadgurum || 1||

आतसीपुष्पसंकाशम् हारनूपुरशोभितम्
रत्नकण्कणकेयूरं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ २॥
ātasī-puṣpa-saṅkāśam hāranūpura-śobhitam
ratna-kaṇkaṇa-keyūraṁ kṛṣṇaṁ vaṅde jagadgurum || 2||

कुटिलालकसंयुक्तं पूर्णचंद्रनिभाननम्
विलसत्कुण्डलधरं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ ३॥
kuṭilālakasaṁyuktaṁ pūrṇa-caṅdranibhānanam
vilasat-kuṇḍala-dharaṁ kṛṣṇaṁ vaṅde jagadgurum || 3||

मंदारगन्धसंयुक्तं चारुहासं चतुर्भुजम्
बर्हिपिञ्छावचूडाङ्गं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ ४॥
maṅdāra-gandha-saṁyuktaṁ cāru-hāsaṁ catur-bhujam
barhipiñchāvacūḍāṅgaṁ kṛṣṇaṁ vaṅde jagadgurum || 4||

उत्फुल्लपद्मपत्राक्षं नीलजीमूतसन्निभम्
यादवानां शिरोरत्नं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ ५॥
utphulla-padma-patrākṣaṁ nīlajīmūtasannibham
yādavānāṁ śiro-ratnaṁ kṛṣṇaṁ vaṅde jagadgurum || 5||

रुक्मिणीकेळिसंयुक्तं पीतांबरसुशोभितम्
अवाप्ततुलसीगन्धं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ ६॥
rukmiṇī-keḻi-saṁyuktaṁ

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प्रश्न और उत्तर #01

 संजय रथ  17 जनवरी 2013  1 टिप्पणी प्रश्न और उत्तर #01 में

कृपया ध्यान दें कि चार स्लाइड प्रस्तुतियाँ हैं। इन्हें देखना न भूलें। सत्र 1 | 24 जुलाई 2010 कृपया ध्यान…