राशि

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भाव

 संजय रथ  19 जून 2014

भाव

वैदिक ज्योतिष में, जन्म कुंडली भाव चक्र (संस्कृत: चक्र, ‘पहिया’) है। भाव चक्र जीवन का संपूर्ण 360° चक्र है, जो भावों में विभाजित है, और चक्र में प्रभावों को क्रियान्वित करने के हमारे तरीके का प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक भाव के साथ कारक (संस्कृत: कारक, ‘संकेतक’) ग्रह सम्बद्ध होते हैं, जो किसी विशेष भाव की व्याख्या को परिवर्तित कर सकते हैं।

लग्न  सूर्य
बाह्य व्यक्तित्व, शारीरिक बनावट, स्वास्थ्य/कल्याण, बाल, रूप-रंग, स्वाद

2  धन बृहस्पति बुध, शुक्र, सूर्य, चंद्रमा  
धन, पारिवारिक संबंध, खान-पान, वाणी, नेत्र, मृत्यु

3 सहज मंगल
प्राकृतिक अवस्था, सहज स्वभाव, साहस, वीरता, भाई-बहन ,पौरुष

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ग्रह साधना

 संजय रथ  19 जून 2014

ग्रह देशांतर और लग्न की गणना
Graha Sādana
Graha Sādana Slide

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राशि स्वरूप

 संजय रथ  19 जून 2014

राशि – बारह राशि चक्र

(साइडेरियल) राशिचक्र एक कल्पित ३६० अंशों का वृत्ताकार पट्टा है (उष्णकटिबन्धीय राशिचक्र के समान), जिसे १२ समान भागों में विभक्त किया गया है। प्रत्येक द्वादशांश (३० अंश) को एक राशि कहा जाता है (संस्कृत: राशि अर्थात् ‘भाग’)।

ज्योतिष एवं पाश्चात्य राशिचक्र मापन-पद्धति में भिन्न हैं। यद्यपि समकालिक दृष्ट्या दोनों पद्धतियाँ समान प्रतीत होती हैं, तथापि ज्योतिष में प्रायः नक्षत्र राशिचक्र का उपयोग किया जाता है—जिसमें नक्षत्रों को स्थिर पृष्ठभूमि मानकर ग्रहगति का मापन होता है। इसके विपरीत पाश्चात्य ज्योतिष प्रायः उष्णकटिबन्धीय राशिचक्र ग्रहण करता है—जहाँ ग्रहगति का मापन वसन्त विषुव पर सूर्य की स्थिति के आधार पर किया जाता है।