सृष्टि

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मास: महीना

 संजय रथ  15 मई 2014

मासश्चैत्रो थ वैशाखो ज्येष्ठ आषाढ संज्ञकः।
ततस्तु श्रावणो भाद्रपदाथाश्चिनसंज्ञकः॥
कार्तिको मार्गशीर्षश्च पौशो माघोथ फाल्गुनः।
एतानि मासनामानि चैत्रा दीनां क्रमाद्विदुः॥
māsaścaitro tha vaiśākho jyeṣṭha āṣāḍha saṁjñakaḥ|
tatastu śrāvaṇo bhādrapadāthāśvinasaṁjñakaḥ ||
kārtiko mārgaśīrṣaśca pauśo māghotha phālgunaḥ |
etāni māsanāmāni caitrā dīnāṁ kramādviduḥ ||
महीनों को मास कहा जाता है और एक साल (संवत्सर, वर्ष) में बारह महीने होते हैं। इन महीनों को कहा जाता है —

चित्रा नक्षत्र में पूर्णिमा के बाद चैत्र

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दीक्षा

 संजय रथ  1 अप्रैल 2014

मृत्युंजय मंत्र
त्र्यंबक्कं यजामहे सुगन्धिं पुष्टीवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्दनाम् मृत्योर्मोक्षीय मामृतात्॥
tryaṁbakkaṁ yajāmahe sugandhiṁ puṣṭīvardhanam|
urvārukamiva bandanām mṛtyormokṣīya māmṛtāt||

पराशर के पितामह महर्षि वशिष्ठ द्वारा सिखाए गए इस महामंत्र की सूक्ष्मताओं को समझना।
मृत्युंजय मंत्र दीक्षा |

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नक्षत्र

 संजय रथ  14 अप्रैल 2013

नक्षत्र या चंद्र गृह, वैदिक ज्योतिष में प्रयुक्त आकाश के 27/28 भागों में से एक है, जिसकी पहचान उनमें स्थित प्रमुख तारों से होती है। ऐतिहासिक (मध्यकालीन) हिंदू ज्योतिष में उपयोग की पद्धति के आधार पर 27 या 28 नक्षत्रों की गणना की गई है। सर्वतोभद्र या ऐसे ही किसी चक्र का प्रयोग न किया जा रहा हो, तो नक्षत्रों की संख्या प्रायः 27 ही होती है। प्रत्येक नक्षत्र को 3°20’ के चतुर्थांशों या पादों में विभाजित किया गया है। चूंकि हर चीज़ की उत्पत्ति ध्वनि से होती है, इसलिए ये पद बनते हैं