सज-1

PJC प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए

0 72

दीक्षा

 संजय रथ  1 अप्रैल 2014

मृत्युंजय मंत्र
त्र्यंबक्कं यजामहे सुगन्धिं पुष्टीवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्दनाम् मृत्योर्मोक्षीय मामृतात्॥
tryaṁbakkaṁ yajāmahe sugandhiṁ puṣṭīvardhanam|
urvārukamiva bandanām mṛtyormokṣīya māmṛtāt||

पराशर के पितामह महर्षि वशिष्ठ द्वारा सिखाए गए इस महामंत्र की सूक्ष्मताओं को समझना।
मृत्युंजय मंत्र दीक्षा |

0 83

श्रीकृष्ण अष्टक

 संजय रथ  25 सितम्बर 2013

शंकर भगवत्पाद द्वारा रचित, इस श्रीकृष्ण अष्टक का गायन हर शाम बुराइयों को दूर करने के लिए किया जाना चाहिए। यह पीजेसी-1 बैच 2, 2013 हिमालय कक्षा में सरबानी रथ द्वारा पढ़ाया गया था। हमें आशा है कि आने वाले बैच भी कृष्ण के इस गीत को सीखेंगे जो कलियुग के संकटों से हमारी रक्षा करता है।

भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं
स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम्‌।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं
अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम्‌॥ १॥
bhaje vrajaika-maṇḍanaṁ samasta-pāpa-khaṇḍanaṁ
sva-bhakta-citta-raṅjanaṁ sadaiva nanda-nandanam |
supiccha-guccha-mastakaṁ sunāda-veṇu-hastakaṁ
anaṅga-raṅga-sāgaraṁ namāmi kṛṣṇa-nāgaram || 1||

मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं
विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम्‌।
करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं
महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णावारणम्‌॥ २॥
manoja-garva-mocanaṁ viśāla-lola-locanaṁ
vidhūta-gopa-śocanaṁ namāmi padma-locanam |
karāravinda-bhū-dharaṁ smitāva-loka-sundaraṁ
mahendra-māna-dāraṇaṁ namāmi kṛṣṇā-vāraṇam

0 43

कृष्णाष्टकम

 संजय रथ  25 सितम्बर 2013

प्रतिदिन सुबह इसका पाठ करें

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ १॥
vasu-deva-sutaṁ devaṁ kaṅsa-cāṇūra-mardanam
devakī-paramānandaṁ kṛṣṇaṁ vaṅde jagadgurum || 1||

आतसीपुष्पसंकाशम् हारनूपुरशोभितम्
रत्नकण्कणकेयूरं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ २॥
ātasī-puṣpa-saṅkāśam hāranūpura-śobhitam
ratna-kaṇkaṇa-keyūraṁ kṛṣṇaṁ vaṅde jagadgurum || 2||

कुटिलालकसंयुक्तं पूर्णचंद्रनिभाननम्
विलसत्कुण्डलधरं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ ३॥
kuṭilālakasaṁyuktaṁ pūrṇa-caṅdranibhānanam
vilasat-kuṇḍala-dharaṁ kṛṣṇaṁ vaṅde jagadgurum || 3||

मंदारगन्धसंयुक्तं चारुहासं चतुर्भुजम्
बर्हिपिञ्छावचूडाङ्गं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ ४॥
maṅdāra-gandha-saṁyuktaṁ cāru-hāsaṁ catur-bhujam
barhipiñchāvacūḍāṅgaṁ kṛṣṇaṁ vaṅde jagadgurum || 4||

उत्फुल्लपद्मपत्राक्षं नीलजीमूतसन्निभम्
यादवानां शिरोरत्नं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ ५॥
utphulla-padma-patrākṣaṁ nīlajīmūtasannibham
yādavānāṁ śiro-ratnaṁ kṛṣṇaṁ vaṅde jagadgurum || 5||

रुक्मिणीकेळिसंयुक्तं पीतांबरसुशोभितम्
अवाप्ततुलसीगन्धं कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्॥ ६॥
rukmiṇī-keḻi-saṁyuktaṁ