भावेश-I (भू लोक)
भू लोक (पृथ्वी लोक) से संबंधित चार भाव लग्न (प्रथम), धन (द्वितीय), सहज (तृतीय) और सुख (चतुर्थ) हैं। इन शब्दों के अर्थ अच्छी तरह से समझ लें, अन्यथा आप इन भावों का अर्थ कभी नहीं समझ पाएँगे। जब किसी भाव का स्वामी किसी भी भाव में स्थित हो, तो भाव के परिणामों का आकलन करने के सिद्धांतों को समझना महत्वपूर्ण है। भावेश (भाव का स्वामी) उस भाव (भाव) का वास्तविक कर्ता होता है। यदि यह (क) लग्न और (ख) उस भाव से अच्छी स्थिति में हो, तो यह आमतौर पर क्रमशः (क) जातक के लिए एक अनुभव और (ख) भाव की अभिव्यक्ति के रूप में अच्छे परिणाम देता है।



