सज-1

PJC प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए

1 196

राशि स्वरूप

 संजय रथ  19 जून 2014

राशि – बारह राशि चक्र

(साइडेरियल) राशिचक्र एक कल्पित ३६० अंशों का वृत्ताकार पट्टा है (उष्णकटिबन्धीय राशिचक्र के समान), जिसे १२ समान भागों में विभक्त किया गया है। प्रत्येक द्वादशांश (३० अंश) को एक राशि कहा जाता है (संस्कृत: राशि अर्थात् ‘भाग’)।

ज्योतिष एवं पाश्चात्य राशिचक्र मापन-पद्धति में भिन्न हैं। यद्यपि समकालिक दृष्ट्या दोनों पद्धतियाँ समान प्रतीत होती हैं, तथापि ज्योतिष में प्रायः नक्षत्र राशिचक्र का उपयोग किया जाता है—जिसमें नक्षत्रों को स्थिर पृष्ठभूमि मानकर ग्रहगति का मापन होता है। इसके विपरीत पाश्चात्य ज्योतिष प्रायः उष्णकटिबन्धीय राशिचक्र ग्रहण करता है—जहाँ ग्रहगति का मापन वसन्त विषुव पर सूर्य की स्थिति के आधार पर किया जाता है।

0 133

भावचक्र: भाव

 संजय रथ  19 जून 2014

भावचक्र: भाव

कुंडली के 12 भावों का परीक्षण। ये लग्न से माने गए भाव हैं जिसे प्रथम भाव माना जाता है।

परिणामों का निर्णय

भावों के निर्णय में शामिल सिद्धांतों को समझना। इसमें भावों का कल्याणऔर विनाश – कारण शामिल हैं।

0 146

केंद्र

 संजय रथ  19 जून 2014

यह हममें से कोई महसूस नहीं कर सकता, लेकिन ब्रिटेन हर 12 घंटे 25 मिनट में कुछ सेंटीमीटर ऊपर-नीचे होता है, क्योंकि समुद्र का एक विशाल उभार देश के चारों ओर घूमता रहता है।
जोनाथन अमोस, बीबीसी की रिपोर्ट

चन्द्र ज्वार (Lunar Tides)
चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी को अत्यधिक ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे वैश्विक महासागरों में ज्वार-भाटा होता  है। इस सारी ऊर्जा का क्या होता है? इस प्रश्न पर वैज्ञानिक 200 से भी ज़्यादा वर्षों से विचार कर रहे हैं, और इसके परिणाम चंद्रमा के इतिहास से लेकर महासागरों के मिश्रण तक, कई क्षेत्रों में फैले हैं। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी को खींचता है, जिससे समुद्र का पानी ज्वार-भाटा नामक पूर्वानुमानित तरंगों में आगे-पीछे हिलता है।