Diksha

mrityunjaya_jkk94

Mrityunjaya Mantra

त्र्यंबक्कं यजामहे सुगन्धिं पुष्टीवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्दनाम् मृत्योर्मोक्षीय मामृतात्॥
tryaṁbakkaṁ yajāmahe sugandhiṁ puṣṭīvardhanam|
urvārukamiva bandanām mṛtyormokṣīya māmṛtāt||

Essential Lesson

Understanding the subtleties of this Mahamantra, taught by Maharishi Vashishtha, Parashara’s grandfather.

Mṛtyuṅjaya Mantra Initiation

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संजय रथ (उड़िया: ସଞୟ ରଥ) पुरी के ज्योतिषियों के एक पारंपरिक परिवार से आते हैं, जिसका वंश श्री अच्युत दास (अच्युतानंद) से जुड़ा है। संजय रथ ज्योतिष की नींव के रूप में बृहत पाराशर होराशास्त्र, जैमिनी उपदेश सूत्र, बृहत जातक और कल्याणवर्मा की सारावली का उपयोग करते हैं और विभिन्न अन्य ज्योतिष शास्त्रों से शिक्षा देते हैं। उनकी समग्र शिक्षा और लेखन विभिन्न विचारधाराओं में फैले हुए हैं, हालांकि उन्होंने ज्योतिष का अपना ब्रांड नहीं बनाया है।